भीगे पथ से अग्नि पथ तक
शनिवार, 14 जनवरी 2012
जो राग उठे हैं मेरे मन में, उन्हें दबाकर क्यों रक्खा है,
स्वप्न जगे हैं जो नयनों में , उन्हें सुलाकर क्यों रक्खा है ?
जीने की हर चाहत ने भी , अब जीना जैसे छोड़ दिया ,
जो लम्हे बिताये संग - तेरे , उन्हें जिलाकर क्यों रक्खा है ?
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