धुंए पर गीत लिखता हूँ , धुंआ दिल से उठा होगा ,
न जाने किन ख्वाबों का , धुआं दिल से उठा होगा //
न जाने कौन -सी होंगी , वो लपटें झोंकती दिल को ,
जिन्हें तुमने सहा होगा , जिन्हें हमने दहा होगा //
बिछुड़ने का नहीं मातम ,न मिलने की ख़ुशी इतनी ,
सुबह से शाम तक उतरी , निगाहों में नमी कितनी //
वो कुछ दिन या महीने कुछ ,कहाँ तक वो ठहर पाते ,
तुम्हारे साथ जीने की तमन्नायें घुटीं कितनी //
चले जाते हैं अक्सर ही , हजारों लोग दुनिया से ,
किसी से पूछ तो लेते ,कहाँ तूफाँ उठा होगा //
तुम्हारी भी निगाहों में ,सबेरे कुछ समाये थे ,
हमारी भी निगाहों में ,अँधेरे कुछ समाये थे //
दफ़न होते रहे कैसे ,इशारों ही इशारों में ,
वो नगमे जो कभी तुमको ,महोब्बत के सुनाये थे //
वो जाने की खबर सुनकर , कहाँ तुम जा रहे हो अब ,
हमारी जिंदगानी में , रुआं कैसा उठा होगा //
समय करवट बदलता था ,सहमकर ही गुजरता था ,
हमारे प्यार की भीगी -लिखावट को समझता था //
हजारों कल्प जो हमने ,निगाहों में बिताये थे ,
उन्हें महसूस करता था , उन्हें तस्लीम करता था //
मगर चलने से पहले ही ,तुम्हें वो छीनने आया ,
बताते हम उसे कैसे ,, हमारा क्या हुआ होगा //
धुंए पर गीत लिखता हूँ , धुंआ दिल से उठा होगा ///
मंगलवार, 29 नवंबर 2011
रविवार, 27 नवंबर 2011
हवाओं से लिपट कर के , जरा मैंने कहा रुकना ,
अभी आँचल उड़ाती -सी उसी की याद आयेगी //
उसी की शोखियाँ होंगी ,उसी की मस्तियाँ होंगी ,
फिजाओं को लजाती -सी , हसीं सौगात आयेगी //
यहाँ जो स्वप्न बिखरे हैं ,जरा उनको समेटूंगा ,
उसी के हाथ की कोई ,बुनी तकदीर लेखूँगा //
उसी से रूठना है फिर ,उसी को फिर मनाना है ,
उसी के प्यार की कोई ,नई तस्वीर खींचूंगा //
बहारों को पता है ये ,अगर फिर चूड़ियाँ खनकीं ,
उसी के रश्क में डूबी , शबे -बारात आयेगी //
निशानी जो बचीं उसकी ,जिलाती जा रहीं हैं वो,
दृगों में जो भरा पानी , बहाती जा रहीं हैं वो //
उसी की हलचलों में यह , समय कुछ बीत जाता है ,
कहीं दिल की दराजों में ,समाती जा रहीं हैं वो //
दिशाओं में महकती है , कहीं वो रात -रानी -सी ,
कदम हौले बदाती -सी ,दिले -नाशाद आएगी //
अभी आँचल उड़ाती -सी उसी की याद आयेगी //
उसी की शोखियाँ होंगी ,उसी की मस्तियाँ होंगी ,
फिजाओं को लजाती -सी , हसीं सौगात आयेगी //
यहाँ जो स्वप्न बिखरे हैं ,जरा उनको समेटूंगा ,
उसी के हाथ की कोई ,बुनी तकदीर लेखूँगा //
उसी से रूठना है फिर ,उसी को फिर मनाना है ,
उसी के प्यार की कोई ,नई तस्वीर खींचूंगा //
बहारों को पता है ये ,अगर फिर चूड़ियाँ खनकीं ,
उसी के रश्क में डूबी , शबे -बारात आयेगी //
निशानी जो बचीं उसकी ,जिलाती जा रहीं हैं वो,
दृगों में जो भरा पानी , बहाती जा रहीं हैं वो //
उसी की हलचलों में यह , समय कुछ बीत जाता है ,
कहीं दिल की दराजों में ,समाती जा रहीं हैं वो //
दिशाओं में महकती है , कहीं वो रात -रानी -सी ,
कदम हौले बदाती -सी ,दिले -नाशाद आएगी //
शुक्रवार, 25 नवंबर 2011
कितने दिन से दिल टूटा है , कितने दिन से नहीं मिले हो ,
इन नयनों की पलकों में तुम ,कितने दिन से नहीं खिले हो /
मीलों -मीलों धूप खिली थी ,जब तुम बाँहों में आये थे ,
कितने मौसम बदल -बदल कर ,इस धरती पर इठलाये थे ,
छलक चुकीं हैं झीलें कितनी ,कबसे ,अबतक नहीं मिले हो /
नदियों में जो जल बहता है ,शायद खारा हो जायेगा ,
बिन बरसे यह नभ का बादल ,धुंआ -धकारा हो जायेगा ,
इसे बरसने दो तुम आखिर ,आखिर कबसे नहीं मिले हो /
जाने वाले जब जाते हैं ,सामान दिलों का ले जाते हैं ,
इस मिट्टी में क्या बचता है, जान हमारी ले जाते हैं ,
फिर भी हमको जीना है कुछ , जीवन दोते नहीं मिले हो /
इन नयनों की पलकों में तुम ,कितने दिन से नहीं खिले हो /
मीलों -मीलों धूप खिली थी ,जब तुम बाँहों में आये थे ,
कितने मौसम बदल -बदल कर ,इस धरती पर इठलाये थे ,
छलक चुकीं हैं झीलें कितनी ,कबसे ,अबतक नहीं मिले हो /
नदियों में जो जल बहता है ,शायद खारा हो जायेगा ,
बिन बरसे यह नभ का बादल ,धुंआ -धकारा हो जायेगा ,
इसे बरसने दो तुम आखिर ,आखिर कबसे नहीं मिले हो /
जाने वाले जब जाते हैं ,सामान दिलों का ले जाते हैं ,
इस मिट्टी में क्या बचता है, जान हमारी ले जाते हैं ,
फिर भी हमको जीना है कुछ , जीवन दोते नहीं मिले हो /
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