सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

हर दिन जैसे सिर्फ तुम्हारा गान सुनाने आता है,
पक्षी कलरव करते हैं , नवगान सुनाने आता है /
मन में कितनी आहुतियों का मंत्रोचारण उठता है ,
मंदिर -मस्जिद दोनों का भगवान मनाने आता है //
धूप सुनहली खिलती है ,चंचल कलियाँ मुस्काती हैं ,
मेरी भीगी पलकों में चुपचाप नहाती जाती हैं /
तुमको देखूँ या ना देखूँ ,प्रतिबिंबित हो जाती हो ,
आखिर कोई तो है जो मुझको बहलाने आता है //

रविवार, 12 फ़रवरी 2012

हर दिन जैसे सिर्फ तुम्हारा गान सुनाने आता है,
पक्षी कलरव करते हैं , नवगान सुनाने आता है /
मन में कितनी आहुतियों का मंत्रोचारण उठता है ,
मंदिर -मस्जिद दोनों का भगवान मनाने आता है //

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012

जहाँ तक धूप खिलती है ,बिखरने की तमन्ना है ,
तुम्हारी बेकरारी से , गुजरने की तमन्ना है /
हमारा हाल मत पूछो ,जरा सीने पे सर रख दो ,
धुंए की बेशुमारी तक ,उतरने की तमन्ना है //
निगाहों ही निगाहों में ,तुम्हारा तैरना देखा ,
सुबह की ओस को देखा , नदी की धार को देखा ,
जहाँ तक रेत फैली है ,छलकने की तमन्ना है /
हमारे प्यार के रस्ते ,हजारों मील जाते है ,
कभी तुम पास आते हो , कभी हम पास आते हैं /
तुम्हारी इंतजारी में ,भटकने की तमन्ना है ,
जहाँ तक धूप खिलती है ,बिखरने की तमन्ना है //

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

निगाहों ही निगाहों में ,तुम्हारा तैरना देखा ,
सुबह की ओस को देखा , नदी की धार को देखा ,
जहाँ तक रेत बिखरी है ,छलकने की तमन्ना है /
हमारे प्यार के रस्ते ,हजारों मील जाते है ,
कभी तुम पास आते हो , कभी हम पास आते हैं /
तुम्हारी इंतजारी में ,भटकने की तमन्ना है ,
जहाँ तक धूप खिलती है ,बिखरने की तमन्ना है //

बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

जहाँ तक धूप खिलती है ,बिखरने की तमन्ना है ,
तुम्हारी बेकरारी से , गुजरने की तमन्ना है /
हमारा हाल मत पूछो ,जरा सीने पे सर रख दो ,
धुंए की बेशुमारी तक ,उतरने की तमन्ना है //

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

हर लम्हे में हम तुम्हारा प्यार भरकर जी रहे हैं,
देख लो तुम ,हम ग़मों के पास हँसकर जी रहे हैं /
वो उमंगें वो तरंगें जो कभी तुमसे मिलीं थीं ,
आज उन्में शोखियों के ज्वार भरकर जी रहे हैं //

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

तू खिलता और खिलाता चल ,इस जीवन को मदमाता चल,
सुबह उगे तो तेरे घर से , तू शाम तलक मुस्काता चल ,
छुएँ हवाएँ जो भी तुझको ,तेरी ही खुशबु बन जाएँ ,
तेरी ही आँखों के सपने ,दुनिया की रौनक कहलायें /
कुछ ऐसा दाँव लगाता चल ,सबको गले लगाता चल //
तेरी ताकत वो ताकत है ,जो दुनिया भर की शक्ति है ,
तेरी हस्ती वो हस्ती है ,जो दुनिया भर की मस्ती है ,
इक ऐसा गाँव बसाता चल ,तू बुझते दीप जलाता चल /

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

जीवन का यह क्रम क्यों बिगड़ा , किससे पूछें हम यह जाकर ,
नींदें भी अब छोड़ रहीं है ,साथ हमारा क्यों घबराकर ?
बचा हुआ सामान तुम्हारा, क्यों रोज समेटा करते हैं ,
जीना भी यह क्या जीना है ,टूटा -फूटा मन बहलाकर ?