बहुत सुकोमल कली खिली है ,शायद तुमने भी देखा हो ,
बहुत मनोरम धूप खिली है ,शायद झीलों में देखा हो,
अभी- अभी कुछ पर्वत पिघले ,अभी -अभी कुछ झरने निकले ,
धीमी-धीमी हवा चली है , शायद तुमने भी देखा हो //
कोई दिल की भाषा शायद ,मुखर हुई है अभी -अभी कुछ ,
शायद तुमने इन तरुओं में ,गया जमाना फिर देखा हो //
मेरी भटकी अंखियों में तुम , मचल-मचल कर रह जाते हो ,
एक सलोना सपना शायद ,जीवित तुमने फिर देखा हो //
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