मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

सभी कविता में रूचि रखने बाले मित्रों से अनुरोध है ,अपना पता तथा मोबाईल नंबर मैसेज कर दें/ मैं आप सभी को अपने दो काव्य संग्रह --

[-गीतों के बादल ]

तथा

[भीगे पथ से अग्नि पथ तक ]

भेंट - स्वरुप भेजकर पुस्तकों का लोकार्पण करना चाहता हूँ /

अनेक मित्रों के कोमेंट तथा समीक्षाएं भी प्रकाशित हुईं हैं जिनका मैं सदैव आभारी रहूँगा /

पुस्तकें लगातार कोरियर से भिजवाई जा रहीं हैं / कृपया पुस्तक प्राप्ति की सूचना भी दें /
निगाहों से निगाहों तक समुन्दर ही समुन्दर है ,
जाने कितनी गहराई अंगड़ाती -सी अन्दर है //
प्यास असीमित क्या होती है बतलायें अब कैसे ?
प्यार तुम्हारा नहीं समाता

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

जिन्दगी डूबे अगर तो डूब जाये बस तुम्हीं में ,
साँस जितनी भी चले अब भीग जाये बस तुम्हीं में ,
मैं उतरता जा रहा हूँ उन ख्यालों के भंवर में ,
होश मेरे खींच लें जो आखिरी अब बस तुम्हीं में //

खिल गये कितने सजीले फूल मेरी भावना में ,
मिल गये कितने नशीले कूल मेरी कामना में ,
बस तुम्हारी ज्योत्स्नाएं अब मुझे नहला रहीं हैं ,
चाहता हूँ झिलमिलाऊं मैं पिघलकर बस तुम्हीं में //

हर घड़ी तुमको समर्पित हो रहा है प्यार मेरा ,
इस ह्रदय में बस गया है रूप का संसार तेरा ,
पास कितनी तुम खड़ी हो यह बताना भी कठिन है ,
कौन जाने क्या कशिस है बेतहाशा बस तुम्हीं में //