सभी कविता में रूचि रखने बाले मित्रों से अनुरोध है ,अपना पता तथा मोबाईल नंबर मैसेज कर दें/ मैं आप सभी को अपने दो काव्य संग्रह --
[-गीतों के बादल ]
तथा
[भीगे पथ से अग्नि पथ तक ]
भेंट - स्वरुप भेजकर पुस्तकों का लोकार्पण करना चाहता हूँ /
अनेक मित्रों के कोमेंट तथा समीक्षाएं भी प्रकाशित हुईं हैं जिनका मैं सदैव आभारी रहूँगा /
पुस्तकें लगातार कोरियर से भिजवाई जा रहीं हैं / कृपया पुस्तक प्राप्ति की सूचना भी दें /
भीगे पथ से अग्नि पथ तक
मंगलवार, 17 अप्रैल 2012
शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012
जिन्दगी डूबे अगर तो डूब जाये बस तुम्हीं में ,
साँस जितनी भी चले अब भीग जाये बस तुम्हीं में ,
मैं उतरता जा रहा हूँ उन ख्यालों के भंवर में ,
होश मेरे खींच लें जो आखिरी अब बस तुम्हीं में //
खिल गये कितने सजीले फूल मेरी भावना में ,
मिल गये कितने नशीले कूल मेरी कामना में ,
बस तुम्हारी ज्योत्स्नाएं अब मुझे नहला रहीं हैं ,
चाहता हूँ झिलमिलाऊं मैं पिघलकर बस तुम्हीं में //
हर घड़ी तुमको समर्पित हो रहा है प्यार मेरा ,
इस ह्रदय में बस गया है रूप का संसार तेरा ,
पास कितनी तुम खड़ी हो यह बताना भी कठिन है ,
कौन जाने क्या कशिस है बेतहाशा बस तुम्हीं में //
साँस जितनी भी चले अब भीग जाये बस तुम्हीं में ,
मैं उतरता जा रहा हूँ उन ख्यालों के भंवर में ,
होश मेरे खींच लें जो आखिरी अब बस तुम्हीं में //
खिल गये कितने सजीले फूल मेरी भावना में ,
मिल गये कितने नशीले कूल मेरी कामना में ,
बस तुम्हारी ज्योत्स्नाएं अब मुझे नहला रहीं हैं ,
चाहता हूँ झिलमिलाऊं मैं पिघलकर बस तुम्हीं में //
हर घड़ी तुमको समर्पित हो रहा है प्यार मेरा ,
इस ह्रदय में बस गया है रूप का संसार तेरा ,
पास कितनी तुम खड़ी हो यह बताना भी कठिन है ,
कौन जाने क्या कशिस है बेतहाशा बस तुम्हीं में //
सोमवार, 13 फ़रवरी 2012
हर दिन जैसे सिर्फ तुम्हारा गान सुनाने आता है,
पक्षी कलरव करते हैं , नवगान सुनाने आता है /
मन में कितनी आहुतियों का मंत्रोचारण उठता है ,
मंदिर -मस्जिद दोनों का भगवान मनाने आता है //
धूप सुनहली खिलती है ,चंचल कलियाँ मुस्काती हैं ,
मेरी भीगी पलकों में चुपचाप नहाती जाती हैं /
तुमको देखूँ या ना देखूँ ,प्रतिबिंबित हो जाती हो ,
आखिर कोई तो है जो मुझको बहलाने आता है //
पक्षी कलरव करते हैं , नवगान सुनाने आता है /
मन में कितनी आहुतियों का मंत्रोचारण उठता है ,
मंदिर -मस्जिद दोनों का भगवान मनाने आता है //
धूप सुनहली खिलती है ,चंचल कलियाँ मुस्काती हैं ,
मेरी भीगी पलकों में चुपचाप नहाती जाती हैं /
तुमको देखूँ या ना देखूँ ,प्रतिबिंबित हो जाती हो ,
आखिर कोई तो है जो मुझको बहलाने आता है //
रविवार, 12 फ़रवरी 2012
शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012
जहाँ तक धूप खिलती है ,बिखरने की तमन्ना है ,
तुम्हारी बेकरारी से , गुजरने की तमन्ना है /
हमारा हाल मत पूछो ,जरा सीने पे सर रख दो ,
धुंए की बेशुमारी तक ,उतरने की तमन्ना है //
निगाहों ही निगाहों में ,तुम्हारा तैरना देखा ,
सुबह की ओस को देखा , नदी की धार को देखा ,
जहाँ तक रेत फैली है ,छलकने की तमन्ना है /
हमारे प्यार के रस्ते ,हजारों मील जाते है ,
कभी तुम पास आते हो , कभी हम पास आते हैं /
तुम्हारी इंतजारी में ,भटकने की तमन्ना है ,
जहाँ तक धूप खिलती है ,बिखरने की तमन्ना है //
तुम्हारी बेकरारी से , गुजरने की तमन्ना है /
हमारा हाल मत पूछो ,जरा सीने पे सर रख दो ,
धुंए की बेशुमारी तक ,उतरने की तमन्ना है //
निगाहों ही निगाहों में ,तुम्हारा तैरना देखा ,
सुबह की ओस को देखा , नदी की धार को देखा ,
जहाँ तक रेत फैली है ,छलकने की तमन्ना है /
हमारे प्यार के रस्ते ,हजारों मील जाते है ,
कभी तुम पास आते हो , कभी हम पास आते हैं /
तुम्हारी इंतजारी में ,भटकने की तमन्ना है ,
जहाँ तक धूप खिलती है ,बिखरने की तमन्ना है //
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)