शब्दों से जब धुन निकलेगी ,साज तुम्हारा उनमें होगा,
जितने दिल में भरे खजाने ,राज तुम्हारा उनमें होगा //
अगर चुनेगा कोई आकर ,बचा हुआ सामान पुराना ,
कंकड़ -पत्थर जो निकलेंगे ,ताज तुम्हारा उनमें होगा //
बुझी नहीं चिंगारी अबतक ,राख तुम्हारी है माथे पर ,
हसरत जलकर बुझी नहीं हैं ,याद तुम्हारी है माथे पर //
शोले कितने दहक रहे हैं ,अभी चिता के तेरी मुझमें ,
दूंद रहा हूँ उनमें तुमको ,फूँक लगाकर मैं माथे पर //
शायद कोई बीते कल का , आज तुम्हारा उनमें होगा //
क्यों होती है इस दुनिया में ,इस जीवन की , ख़तम कहानी ,
रह जाता है क्यों पलकों में , तृष्णाओं का खारा पानी //
अभी हजारों साँसों का वो ,मेला तुमने ही जोड़ा था ,
तुम ही मिलकर बिछुड़ गए क्यों , ध्वस्त हो गयीं सभी निशानी //
अगर खिलीं यह कलियाँ फिर से ,सोज तुम्हारा उनमें होगा //
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