सोमवार, 12 दिसंबर 2011

चलो चलें हम चलकर देखें , यह नदी कहाँ तक बहती है /
यह हवा कहाँ तक चलती है ,यह शाम कहाँ पर होती है //
यह सारी सीमायें आखिर ,किस पर्वत पर जाकर मिलतीं /
यह पक्षी नभ में क्यों उड़ते हैं ,यह सुबह कहाँ पर रहती है //

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