भीगे पथ से अग्नि पथ तक
शनिवार, 3 दिसंबर 2011
सूरज डूबा , शाम दली है ,आधा -आधा चाँद खिला है ,
पक्षी थककर बापस लौटे , तेरा कुछ पैगाम मिला है //
मन के भीतर तुझको देखा , तन के भीतर तुझको देखा ,
तेरे तटबंधों पर ही बस, जीवन को विश्राम मिला है //
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