भीगे पथ से अग्नि पथ तक
मंगलवार, 27 दिसंबर 2011
पुतलियों में नभ भरा है ,पुतलियों में जग भरा है ,
रोशनी का पंथ कोई ,पुतलियों में दिख रहा है //
एक दर्पण है तुम्हारा ,एक सागर है तुम्हारा ,
पुतलियों में क्यों अभी तक ,एक जीवन जग रहा है //
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें