तू खिलता और खिलाता चल ,इस जीवन को मदमाता चल,
सुबह उगे तो तेरे घर से , तू शाम तलक मुस्काता चल ,
छुएँ हवाएँ जो भी तुझको ,तेरी ही खुशबु बन जाएँ ,
तेरी ही आँखों के सपने ,दुनिया की रौनक कहलायें /
कुछ ऐसा दाँव लगाता चल ,सबको गले लगाता चल //
तेरी ताकत वो ताकत है ,जो दुनिया भर की शक्ति है ,
तेरी हस्ती वो हस्ती है ,जो दुनिया भर की मस्ती है ,
इक ऐसा गाँव बसाता चल ,तू बुझते दीप जलाता चल /
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