शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

जिन्दगी डूबे अगर तो डूब जाये बस तुम्हीं में ,
साँस जितनी भी चले अब भीग जाये बस तुम्हीं में ,
मैं उतरता जा रहा हूँ उन ख्यालों के भंवर में ,
होश मेरे खींच लें जो आखिरी अब बस तुम्हीं में //

खिल गये कितने सजीले फूल मेरी भावना में ,
मिल गये कितने नशीले कूल मेरी कामना में ,
बस तुम्हारी ज्योत्स्नाएं अब मुझे नहला रहीं हैं ,
चाहता हूँ झिलमिलाऊं मैं पिघलकर बस तुम्हीं में //

हर घड़ी तुमको समर्पित हो रहा है प्यार मेरा ,
इस ह्रदय में बस गया है रूप का संसार तेरा ,
पास कितनी तुम खड़ी हो यह बताना भी कठिन है ,
कौन जाने क्या कशिस है बेतहाशा बस तुम्हीं में //

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