धुंए पर गीत लिखता हूँ , धुंआ दिल से उठा होगा ,
न जाने किन ख्वाबों का , धुआं दिल से उठा होगा //
न जाने कौन -सी होंगी , वो लपटें झोंकती दिल को ,
जिन्हें तुमने सहा होगा , जिन्हें हमने दहा होगा //
बिछुड़ने का नहीं मातम ,न मिलने की ख़ुशी इतनी ,
सुबह से शाम तक उतरी , निगाहों में नमी कितनी //
वो कुछ दिन या महीने कुछ ,कहाँ तक वो ठहर पाते ,
तुम्हारे साथ जीने की तमन्नायें घुटीं कितनी //
चले जाते हैं अक्सर ही , हजारों लोग दुनिया से ,
किसी से पूछ तो लेते ,कहाँ तूफाँ उठा होगा //
तुम्हारी भी निगाहों में ,सबेरे कुछ समाये थे ,
हमारी भी निगाहों में ,अँधेरे कुछ समाये थे //
दफ़न होते रहे कैसे ,इशारों ही इशारों में ,
वो नगमे जो कभी तुमको ,महोब्बत के सुनाये थे //
वो जाने की खबर सुनकर , कहाँ तुम जा रहे हो अब ,
हमारी जिंदगानी में , रुआं कैसा उठा होगा //
समय करवट बदलता था ,सहमकर ही गुजरता था ,
हमारे प्यार की भीगी -लिखावट को समझता था //
हजारों कल्प जो हमने ,निगाहों में बिताये थे ,
उन्हें महसूस करता था , उन्हें तस्लीम करता था //
मगर चलने से पहले ही ,तुम्हें वो छीनने आया ,
बताते हम उसे कैसे ,, हमारा क्या हुआ होगा //
धुंए पर गीत लिखता हूँ , धुंआ दिल से उठा होगा ///
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